एंग्री यंग मैन 

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बचपन से ही सुमित को बेहद पसंद थी अमिताभ बच्चन की फ़िल्में। 

सोचता था वो भी ऐसा ही धीर गंभीर आत्मकेंद्रित बनेगा।


शादी के दस साल बाद एक दिन बातों ही बातों में अपनी पत्नी नेहा 

को ये बात बताई तो नेहा हंस पडी।



"फिर आप बने क्यों नहीं जी अमिताभ जैसे गुस्सैल जवान पुरुष ? 

आप तो आनंद के राजेश खन्ना जैसे सदा मुस्कुराने वाले बन गए। "


"क्या करते। सब ठीक ही हुआ जिंदगी में। माता -पिता अच्छे। भाई 

बहन अच्छे। दोस्त मिले वो भी अच्छे। पड़ोसी भी अच्छे। कभी 

बेरोजगार भी नहीं रहे। 12 वीं करते ही नौकरी करने लगे। शादी भी 

आराम से हो गयी। ऑफिस भी ठीक है। तुम भी अच्छी हो और बच्चे 

भी ठीक हैं। छोटा तो जिंदगी भर साथ निभाने वाला है। तो किस बात 

पर गुस्सैल हो पाते ?"


नेहा हंस दी। पति ऐसे मिले जो सदा अच्छा ही सोचते ।


उनकी जगह कोई दूसरा होता तो शायद इन्ही बातों में दुखी होने के 

कारण ढूंढ लेता। बड़े परिवार में पले जहाँ ज्यादा शौक पूरे नहीं हो 

सकते थे। 12 वीं से नौकरी करने लगे सो कभी कॉलेज की बेफिक्री 

का लुत्फ़ नहीं उठाया। विरासत में कोई जायदाद नहीं मिली सब कुछ 

खुद संघर्ष कर खड़ा किया।छोटा भाई दिव्यांग है। सो जिंदगी भर 

उन पर ही निर्भर रहेगा। फिर भी कभी किसी से कोई शिकायत नहीं 

न इंसानों से ना ही भगवान् से।


बहुत गर्व हो आया अपने पति पर और अपनी पसंद पर नाज़ भी !


राहत भी की पति एंग्री यंग मैन नहीं बने !!


मौलिक रचना सर्वाधिकार सुरक्षित

अ. जग्गी

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